अब महाराष्ट्र में शिवसेना सरकार पर मडरा रहे सं’कट के बादल! कांग्रेस की मु’श्किलें बढ़ीं..

अभी राजस्थान का सिया’सी सं’कट थ’मा नहीं हैं कि आं’तरिक कलह ने कांग्रेस आलाकमान की परे’शानी बढ़ा दी हैं। आपको बता दें कि अब जो सं’केत महा’राष्ट्र से मिल रहे हैं उससे तो पार्टी के अं’तरिम अध्यक्ष सोनिया गांधी भी बहुत बुरी तरह परे’शान होने वाली है। उद्धव ठाकरे के नेतृत्व में महाराष्ट्र में महाविकास आघा’डी सरकार (Shivsena Government) पर सं’कट के बादल मं’डराने शुरू हो गए हैं।

कांग्रेस एनसीपी के समर्थन से बनी राज्य की पहली शिवसेना सरकार (Shivsena Government) से गठबंधन के कई विधायक नारा’ज हो चुके हैं। और ऐसे में करीब दर्जनभर एनसीपी विधायकों ने बीजेपी से संपर्क किया है।

गौरतलब है कि महाराष्ट्र में बेमेल गठबंधन करते हुए शिवसेना ने दशकों पुरानी साथी बीजेपी से गठबंधन तो’ड़ कांग्रेस-एनसीपी के समर्थन से सरकार बनाई थी. सूबे के पहले शिवसैनिक मुख्यमंत्री बतौर शपथ लेने के साथ ही उद्धव ठाकरे के लिए मंत्रिमंडल के गठन और विभागों के बं’टवारे को लेकर पहली चुनौती पेश आई. किस-किस पार्टी के कितने चेहरे और कौन से विभाग को लेकर खीं’चतान कई महीनों तक चली थी. इसके बाद भी विभागों के बं’टवारे को लेकर त’नाव की खबरें आती रहीं. हालांकि एनसीपी और कांग्रेस के शीर्ष नेताओं ने अफ’वाहों को ध’ता बता सब कुछ ठीक है का संदेश ही दिया. यह अलग बात है कि आपसी मत’भेद भीतर ही भीतर सु’लग’ते रहे.

एनसीपी विधायक इस महीने के अंत में भाजपा का दामन थाम सकते हैं

हालाकी जानकारी से पता चला है कि उद्धव ठाकरे सरकार से नाराज एनसीपी के दर्जनभर विधायकों ने बीजेपी के साथ संपर्क किया है। कयास यह भी लगाए जा रहे हैं कि शिवसेना नीत गठबंधन सरकार से ना’खुश चल रहे एनसीपी विधायक इस महीने के अंत में भाजपा का दामन थाम सकते हैं अगर ऐसा होता है तो महाराष्ट्र में कांग्रेस एनसीपी समर्थित शिवसेना सरकार का भी गि’रना तय माना जाएगा। फिलहाल राज्य की 288 सदस्य विधानसभा में बीजेपी के 105 विधायक है तो एनसीपी के 54 और शिवसेना के 56 विधायक हैं। कांग्रेस के 44 सदस्य हैं एनसीपी के दर्जनभर विधायक टू’टते ही तय हो जाएगा कि अन्य ना’राज विधायक भी बीजेपी का दामन थाम सकते हैं।

हालांकि इसपर अभी कुछ कहा नहीं जा सकता है, यह सभी बातें अभी चर्चाओं के आधार पर हैं. सोशल मीडिया पर लोगों की प्रतिक्रया और नेताओं के बयानों से ऐसी सियासी हल’चल है. बहरहाल क्या होता है यह तो आगे आने वाले समय में ही साफ़ हो पायेगा।

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