किसान नेता राकेश टिकैत की सरकार को दो टूक, कहा- कानून वापसी नहीं तो घर वापसी भी नहीं..

राकेश टिकैत की सरकार को तो टूक

कृषि कानून के खिलाफ किसानों का आंदोलन लगातार जारी है. दिल्ली की ठंड और बारिश के बाद भी किसानों के हौसले डिगे नहीं है और उनका कहना है कि, वह अपना हक़ लेकर ही जाएंगे। किसान नेता लगातार यह कह रहे हैं कि, सरकार कानून वापस ले ले फिर वो सभी घर चले जाएंगे। राकेश टिकैत (Rakesh tikait on farm laws) ने चेतावनी भरे लहजे में कहा कि, कानून वापसी नहीं तो घर वापसी भी नहीं।

ऐसे में सरकार किसानों को कृषि कानून के फायदे गिना रही है. तो वहीं किसान नेता लगातार बिलों को रद्द और वापस लेने की मांग कर रहे हैं. इसी बीच अब राकेश टिकैत ने बड़ा बयान दे दिया है. राकेश टिकैत (Rakesh tikait on farm laws) ने हाल ही में पत्रकारों से बात करते हुए कहा साफ कह दिया है कि, जब तक कानून वापसी नहीं, तब तक घर वापसी नहीं। वह कहते हैं कि, मोदी सरकार के बाद अब खट्टर सरकार का इलाज करेंगे। यानि अब किसान नेता हरियाणा सरकार का भी तेजी घेराव करने का प्लान बना रहे हैं. देखना होगा कि, अब आखिर यह आंदोलन किस ओर मोड़ लेता है.

ठंड और बारिश में भी डटे हैं किसान

जाहिर है दिल्ली में बीते कुछ दिनों में काफी बारिश हुई है, जिसकी वजह से सड़क किनारे रह रहे किसानों के टेंट में पानी भर गया. लेकिन इस परेशनी के बाद भी उनके हौसले पस्त नहीं हुए हैं और अब वह अपने अपने ट्रैक्टर ट्रॉलियों में तिरपाल डालकर रह रहे हैं. पुरुषों के साथ ही अब सिंघु बॉर्डर और टिकरी पर भारी संख्या में महिलाओं और बच्चों का भी जमावड़ा देखने को मिल रहा है.

सभी अपने परिवार के साथ टेंट और ट्रॉलियों में रह रहे हैं और अपने हक के लिए लगातार आवाज उठा रहे हैं. किसानों का बार बार यही कहना है कि, वह अब वापस नहीं जाने वाले है. जब तक इन कानूनों को मोदी सरकार वापस नहीं ले लेती है.

किसानों के हक के लिए सुप्रीम कोर्ट जायेंगे कैप्टन

दरअसल कैप्टन अमरिंदर ने किसानों के समर्थन में फिर आवाज उठाते हुए केंद्र से कहा कि अगर किसान कानूनों को वापस लेने के लिए कह रहे हैं तो आप कानून वापस ले सकते हैं और बाद में किसान संगठनों से बात कर सकते हैं कि आप कौन सा कानून चाहते हैं. लेकिन राज्य में शांति लाने और किसानों को घर लाने के लिए कानूनों को निरस्त करें क्योंकि वे इसकी मांग कर रहे हैं.

मुख्यमंत्री ने कहा, “किसी भी कानून में वह पवित्रता नहीं है जिसे छुआ नहीं जा सकता. उदाहरण के लिए, संविधान को 1950 में पेश किए जाने के बाद 100 बार संशोधित किया गया है. ऐसा क्यों है कि इस कानून में संशोधन नहीं किया जा सकता है और आपको इसे वापस लेना है? इतना ही नहीं उन्होंने ये भी कहा कि प्रधानमंत्री के स्तर पर इसका समाधान मिलना चाहिए. उन्हें अपने मंत्रियों और गृह मंत्री के साथ बैठकर बात करनी चाहिए और समाधान निकलना चाहिए. समाधान आखिरकार प्रधानमंत्री को ही ढूंढना होगा.

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