जानिए कहां बनता है देश का तिरंगा? कितने लोगों द्वारा मिलकर किया जाता है इसका निर्माण

15 अगस्त की तैयारियां इस साल उतनी खास नहीं हो रही हैं. जाहिर है कोरोना ने सब कुछ ख़राब कर रखा है. हालांकि 73 वे स्वतंत्र दिवस का ज’श्न मनाने की तैयारियां चल रही है। नरेंद्र मोदी एक बार फिर से 15 अगस्त (!5 august Celebration) को दिल्ली के लाल किले पर राष्ट्रीय ध्व’ज तिरंगा (Indian Flag Tiranga) फहराएंगे।

लेकिन क्या आप इस बात को जानते हैं कि देश के लाल किले पर फहरने वाला यह तिरंगा (Tiranga made in this City) कहां बनता है और कौन से बनाता है जो देश की आन बान शान कहे जाने वाले तिरंगे को कौन से लोग बनाते हैं।

KKGSS बनाती है राष्ट्रध्वज ‘तिरंगा’

यह सवाल शायद ही आपके मन में कभी आया होगा कि, आखिर तिरंगा बनाता कौन है। कौन सी संस्था इसका निर्माण करती है और पूरा प्रोसेस क्या होता है. तो हम आपको बता दें कि, कर्नाटक के हुबली शहर के बेंगेरी इलाके में स्थित कर्नाटक खादी ग्रामोद्योग संयुक्‍त संघ (फेडरेशन) यानी KKGSS राष्ट्रध्वज ‘तिरंगा’ बनाती है. KKGSS खादी व विलेज इंडस्‍ट्रीज कमीशन द्वारा सर्टिफाइड देश की अकेली ऑथराइज्‍ड नेशनल फ्लैग मैन्‍युफैक्‍चरिंग यूनिट है. यानी इसके अलावा राष्ट्रीय ध्वज कोई और नहीं बनाता है. इसे हुबली यूनिट भी कहा जाता है.

2006 से संस्था बना रही है तिरंगा

2006 से संस्था बना रही है तिरंगा KKGSS की स्‍थापना नवंबर 1957 में हुई थी. इसने 1982 से खादी बनाना शुरू किया. 2005-06 में इसे ब्‍यूरो ऑफ इंडियन स्‍टैंडर्ड्स (BIS) से सर्टिफिकेशन मिला और इसने राष्‍ट्रीय ध्‍वज (Indian Flag tirangaa) बनाना शुरू किया. देश में जहां कहीं भी आधिकारिक तौर पर राष्‍ट्रीय ध्‍वज इस्‍तेमाल होता है, यहीं के बने झंडे की सप्‍लाई की जाती है. विदेशों में मौजूद इंडियन एंबेसीज यानी भारतीय दूतावासों के लिए भी यहीं से तिरंगे बनकर जाते हैं. कोई भी ऑर्डर कर कुरियर के जरिए ​राष्ट्रीय ध्वज KKGSS खरीद सकता है.

बनाने से लेकर झंडे की पैकिंग तक में लगभग 250 लोग करते हैं काम

KKGSS इसके तहत तिरंगे के लिए धागा बनाने से लेकर झंडे की पैकिंग तक में लगभग 250 लोग काम करते हैं। इतना ही नहीं इस में सबसे ज्यादा महिलाएं होती है तिरंगे को इतने चरणों में बनाया जाता है। धागा बनाना, कपड़े की बुनाई करना,ब्‍ली’चिंग व डा’इंग, च’क्र की छपाई, तीनों पटिृयों की सिला’ई, आय’रन करना और टॉग’लिंग आदि इसमें शामिल है

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